Medicine on Wheels : अस्पताल आपके द्वार

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आपने पैलेस ऑन व्हील्स तो सुना होगा लेकिन क्या आपने मेडिसिन ऑन व्हील्स medicine on wheels या हॉस्पिटल ऑन व्हील्स के बारे में सुना है ? तेजी से बदलते हिंदुस्तान में अब दूरदराज गांवों में रह रहे लोगों को दवा या डॉक्टर्स के लिए मीलों नहीं चलना होगा और न ही ट्रेन में सफर के दौरान तबीयत बिगड़ जाने पर आपको घबराने की जरूरत रहेगी। केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय ने इस विषय पर अभूतपूर्व बदलाव किए हैं। मेडिसिन ऑन व्हील्स का कॉन्सेप्ट हाल ही के वर्षों में जीवनरक्षक क्रांति बनकर आया है।

आधुनिक तकनीक से लैस है मेडिसिन ऑन व्हील्स

भारतीय रेलवे का ‘एआई-सक्षम प्रो हेल्थ चेक ऑन व्हील्स’ (AI-enabled Pro Health Check on Wheels) न सिर्फ रेलवे कर्मचारियों बल्कि रेलयात्रियों के लिए जीवनरक्षा का कार्य कर रहा है। भोपाल सहित कई रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत यह यूनिट रेलवे कॉलोनियों व वर्कशॉप में जाकर रेलवे कर्मचारियों व उनके परिवारों के स्वास्थ्य संबंधी परीक्षण करती है और एआई की मदद से हार्ट से जुड़ी जटिल समस्याओं का पता लगाकर उन्हें आगामी खतरों से आगाह करती है। साथ ही स्टेशन पर ऐसे यात्रियों को जो लंबा सफर तय कर रहे हैंए उनका एआई तकनीकी से स्वास्थ्य परीक्षण कर यात्रा में आने वाले संभावित मेडिकल इमरजेंसी के खतरे को कम करती है।

कैसे मिलेगी मेडिकल सुविधा

पश्चिम मध्य रेलवे के सभी टीटीई को मेडिकल किट जिसमें जीवनरक्षक दवाओं का समावेश हैए उपलब्ध कराई गई हैं। यदि आपको सफर के दौरान किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य से जुड़ी तकलीफ हो रही है तो तुरंत टीटीई को सूचना दें। टीटीई संबंधित डॉक्टर से बात कर आपको किट में से जरूरी जीवनरक्षक दवा उपलब्ध कराएंगे और आगामी नजदीकी रेलवे स्टेशन पर आपको तत्काल संभावित मेडिकल फैसिलिटी उपलब्ध कराने की भी हरसंभव कोशिश करेंगे। इस सबके लिए रेलवे आपसे नाममात्र का शुल्क वसूल करेगा

दुर्गम क्षेत्रों में भी मिल रहा है इलाज

जम्मू कश्मीरए महाराष्ट्र के दूर दराज के इलाकों में मेडिसिन ऑन व्हील्स मॉडल से लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पहले जिस इलाज के लिए ग्रामीणों को मीलों जाना होता था अब केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम अंतर्गत हॉस्पिटल ऑन व्हील्स की नई यूनिट मंजूर की गई हैं जो आधुनिक तकनीक से लैस होंगी।

रेल मदद पोर्टल से भी होगा टाईअप

मैमोग्राम एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी सुपरस्पेशियलिटी से लैस इस वैन को भविष्य में रेल मदद पोर्टल और रेलवे की 139 हेल्पलाइन से जोड़ने की भी योजना अंतिम चरण में है। इस टाईअप के बाद रेलयात्रियों को स्टेशन पर पहुंचते ही जीवनरक्षक दवाएं व चिकित्सासुविधा मुहैया हो सकेगी। केंद्र सरकार इस पर तेजी से काम कर रही है।